बिहार बोर्ड (BSEB) · Class 10 · जीवविज्ञान · 2024

जीवविज्ञान 2024 — पिछले वर्ष का पेपर (हल सहित)

Pathyacharya app डाउनलोड करें

प्रश्न और हल (76)

1. मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र खींचें एवं भोजन की पाचन प्रक्रिया का वर्णन करें। (5 अंक)
मानव पाचन तंत्र मुख्यतः निम्नलिखित अंगों से मिलकर बना होता है: uploaded image मुख (माउथ) अन्नप्रणाली (एसोफैगस) पेट (स्टमेक) छोटी आंत (जैजुनम और इलियम) बड़ी आंत (कोलन) मलाशय (रैक्टम) गुदा (एनस) लार ग्रंथियां (स्प्लीन, लार ग्रंथियां) जठरांत्र (लिवर, पित्त थैली, अग्न्याशय) भोजन की पाचन प्रक्रिया: मुख (माउथ): भोजन को चबाने और लार के साथ मिलाने से प्रारंभ होता है, जिससे स्टार्च जल्दी पचता है। अन्नप्रणाली: भोजन अन्नप्रणाली के जरिए पेट में पहुंचता है। पेट: यहाँ भोजन अम्ल और भोजन एंजाइमों द्वारा पचता है, और उसकी बनावट को तरल बना दिया जाता है। छोटी आंत: यहाँ पाचन और अवशोषण का मुख्य कार्य होता है। पित्त और अग्न्याशय से निकले एंजाइम फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा को तोड़ते हैं, और पोषक तत्व शरीर में अवशोषित होते हैं। बड़ी आंत: यहाँ जल और इलेक्ट्रोलाइट्स अवशोषित होते हैं, और अनुपयोगी सामग्री मल के रूप में संग्रहित होती है। मलाशय और गुदा: मल को शरीर से बाहर निकालने का कार्य यहाँ होता है।
2. लैटेक्स पाया जाता है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) कनेर में

  • (A) चीड़ में
  • (B) गुलाब में
  • (C) कनेर में
  • (D) आम में
3. ग्रहणी भाग है (1 अंक)

सही उत्तर: (D) छोटी आँत का

  • (A) मुख गुहा का
  • (B) आमाशय का
  • (C) बड़ी आँत का
  • (D) छोटी आँत का
4. मनुष्य में नासिका छिद्र, लैंरिक्स, ट्रैकिया तथा फेफड़ा मिलकर बनता है (1 अंक)

सही उत्तर: (D) श्वसन तंत्र

  • (A) उत्सर्जन तंत्र
  • (B) जनन तंत्र
  • (C) पाचन तंत्र
  • (D) श्वसन तंत्र
5. पादप में जाइलम उत्तरदायी है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) जल संवहन

  • (A) ऑक्सीजन का संचालन
  • (B) एमीनो अम्ल संवहन
  • (C) जल संवहन
  • (D) भोजन संवहन
6. रुधिर चाप नियंत्रित होता है (1 अंक)

सही उत्तर: एड्रिनल द्वारा

  • वृषण द्वारा
  • थाइमस द्वारा
  • थाइरॉइड द्वारा
  • एड्रिनल द्वारा
7. कौन-सी बीमारी श्वसन तंत्र से संबंधित है ? (1 अंक)

सही उत्तर: निमोनिया

  • मधुमेह
  • मलेरिया
  • निमोनिया
  • डायरिया
8. मुख गुहा में आहार का कौन-सा भाग का पाचन होता है ? (1 अंक)

सही उत्तर: कार्बोहाइड्रेट

  • कार्बोहाइड्रेट
  • प्रोटीन
  • वसा
  • न्यूक्लिक अम्ल
9. परजीवी पौधा का एक उदाहरण है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) अमरबेल

  • (A) गोबरछत्ता
  • (B) ब्रायोफिलम
  • (C) अमरबेल
  • (D) चीड़
10. निम्नलिखित में से कौन रक्त का थक्का जमने के लिए उत्तरदायी है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (A) रक्त बिंबाणु

  • (A) रक्त बिंबाणु
  • (B) श्वेत रक्त कोशिका
  • (C) लाल रक्त कोशिका
  • (D) इनमें से कोई नहीं
11. सजीव जीवधारियों द्वारा किस प्रकार के नाइट्रोजनी पदार्थ का उत्सर्जन होता है? (1 अंक)

सही उत्तर: (D) इनमें से सभी

  • (A) यूरिया
  • (B) अमोनिया
  • (C) यूरिक अम्ल
  • (D) इनमें से सभी
12. कवक में पोषण की कौन-सी विधि है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (B) मृतोपजीवी

  • (A) समभोजी
  • (B) मृतोपजीवी
  • (C) स्वपोषी
  • (D) इनमें से कोई नहीं
13. वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को कहते हैं (1 अंक)

सही उत्तर: (D) नेफ्रॉन

  • (A) मूत्राशय
  • (B) ग्लोमेरुलस
  • (C) बोमैन संपुट
  • (D) नेफ्रॉन
14. वृक्क सहायता प्रदान करता है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) उत्सर्जन में

  • (A) श्वसन में
  • (B) जनन में
  • (C) उत्सर्जन में
  • (D) पाचन में
15. प्रकाश संश्लेषण होता है (1 अंक)

सही उत्तर: (B) केवल दिन में

  • (A) सुबह-शाम
  • (B) केवल दिन में
  • (C) दिन-रात
  • (D) केवल रात में
16. निम्न में सबसे तेज हृदय धड़कन किसका होता है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (C) चूहा

  • (A) हाथी
  • (B) आदमी
  • (C) चूहा
  • (D) ह्वेल
17. कोशिकीय ईंधन निम्न में से कौन है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (B) ग्लूकोज

  • (A) प्रोटीन
  • (B) ग्लूकोज
  • (C) वसा
  • (D) इनमें से कोई नहीं
18. ATP में फॉस्फेट की संख्या कितनी होती है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (C) तीन

  • (A) एक
  • (B) दो
  • (C) तीन
  • (D) चार
19. निम्नलिखित में कौन मनुष्य का एक उत्सर्जी अंग नहीं है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (C) अग्न्याशय

  • (A) फेंफड़ा
  • (B) वृक्क
  • (C) अग्न्याशय
  • (D) त्वचा
20. स्वस्थ व्यक्ति का सिस्टोलिक रक्तचाप होता है (1 अंक)

सही उत्तर: (B) 120 mm Hg

  • (A) 140 mm Hg
  • (B) 120 mm Hg
  • (C) 100 mm Hg
  • (D) 80 mm Hg
21. मछली में श्वसन होता है (1 अंक)

सही उत्तर: (B) गिल्स द्वारा

  • (A) मुँह द्वारा
  • (B) गिल्स द्वारा
  • (C) नाक द्वारा
  • (D) फेंफड़ा द्वारा
22. पौधों के वायवीय भागों से जल का स्टोमाटा द्वारा वाष्प के रूप में निष्कासन कहलाता है (1 अंक)

सही उत्तर: वाष्पोत्सर्जन

  • परासरण
  • वाष्पोत्सर्जन
  • उत्सर्जन
  • विसरण
23. क्रमाकुंचन गति पाई जाती है (1 अंक)

सही उत्तर: ग्रासनली में

  • कोलन में
  • ग्रासनली में
  • अग्न्याशय में
  • छोटी आँत में
24. खुला परिवहन तंत्र पाया जाता है (1 अंक)

सही उत्तर: तितली में

  • कबूतर में
  • तितली में
  • मनुष्य में
  • बिल्ली में
25. रक्त में ऑक्सीजन का वाहक है (1 अंक)

सही उत्तर: हीमोग्लोबिन

  • वसा
  • हॉर्मोन
  • हीमोग्लोबिन
  • कार्बोहाइड्रेट
26. प्रकाश संश्लेषण के लिए दृश्य-प्रकाश स्पेक्ट्रम का सबसे प्रभावी रंग है (1 अंक)

सही उत्तर: लाल

  • लाल
  • नीला
  • पीला
  • हरा
27. साइनुऑरिकुलर नोड क्या है ? (2 अंक)
साइनुऑरिकुलर नोड (Sinu-auricular node), जिसे SA नोड या साइनोएट्रियल नोड भी कहा जाता है, हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर (natural pacemaker) है। यह विशेष हृदय मांसपेशी ऊतकों का एक छोटा समूह है जो हृदय के दाहिने आलिंद (right atrium) की ऊपरी दीवार में स्थित होता है।
28. ग्लाइकोलिसिस क्या है ? (2 अंक)
ग्लाइकोलिसिस वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएं ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज को तोड़ती हैं। इसे हम एक समीकरण की तरह देख सकते हैं, जहाँ हम इनपुट (अभिकारक) और आउटपुट (उत्पाद) की गणना करते हैं। अतः, ग्लाइकोलिसिस के एक चक्र में, ग्लूकोज के ( 1 ) अणु से हमें शुद्ध रूप में ( 2 ) पाइरूवेट, ( 2 ) एटीपी, और ( 2 ) एनएडीएच अणु प्राप्त होते हैं। यह पूरी प्रक्रिया अणुओं के संतुलन और ऊर्जा के रूपांतरण का एक सटीक गणितीय हिसाब है।
29. पोषण की परिभाषा दें। (2 अंक)
पोषण (Nutrition) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई भी जीवधारी (organism) भोजन ग्रहण करता है और उसका उपयोग अपने शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं को चलाने के लिए करता है। सरल शब्दों में, यह भोजन खाने और उसे शरीर के काम में लाने की प्रक्रिया है। इस पूरी प्रक्रिया में भोजन को ग्रहण करना, उसे पचाना, पचे हुए भोजन को अवशोषित करना और फिर उसका उपयोग करना शामिल है। इसी जटिल प्रक्रिया को सामूहिक रूप से पोषण कहा जाता है।
30. रक्त एवं लसीका में अंतर बतायें। (2 अंक)
****रक्त(Blood) और लसीका (Lymph) में मुख्य अंतर:**** **रंग (Color):** रक्त: इसमें लाल रक्त कणिकाएँ (RBCs) होती हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन होता है। इसी कारण रक्त का रंग लाल होता है। लसीका: इसमें लाल रक्त कणिकाएँ नहीं होती हैं, इसलिए यह रंगहीन या हल्का पीला होता है। **संघटन (Composition):** रक्त: रक्त में प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएँ (RBCs), श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBCs) और प्लेटलेट्स पाए जाते हैं। लसीका: लसीका में प्लाज्मा (जिसमें प्रोटीन कम होता है) और केवल श्वेत रक्त कणिकाएँ (मुख्य रूप से लिम्फोसाइट्स) होती हैं। इसमें RBCs और प्लेटलेट्स अनुपस्थित होते हैं। **प्रवाह (Flow):** रक्त: रक्त का प्रवाह एक बंद परिसंचरण तंत्र (धमनियों और शिराओं) में होता है और यह हृदय द्वारा पंप किए जाने के कारण तेजी से बहता है। लसीका: लसीका का प्रवाह धीमा होता है और यह एक-दिशीय (unidirectional) होता है। इसका प्रवाह मांसपेशियों के संकुचन पर निर्भर करता है। **कार्य (Function):** रक्त: इसका मुख्य कार्य ऑक्सीजन, पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करना है। लसीका: इसका मुख्य कार्य शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को मजबूत करना, संक्रमण से लड़ना और ऊतकों से अतिरिक्त तरल पदार्थ को वापस रक्त में लाना है। संक्षेप में: रक्त एक परिवहन माध्यम है, जबकि लसीका मुख्य रूप से एक रक्षा और सफाई प्रणाली है।
31. बाह्य श्वसन क्या है ? (2 अंक)
बाह्य श्वसन, जिसे फुफ्फुसीय श्वसन भी कहते हैं, वह प्रक्रिया है जिसमें फेफड़ों और रक्त के बीच गैसों का आदान-प्रदान होता है। यह प्रक्रिया फेफड़ों की सबसे छोटी इकाइयों, जिन्हें वायुकोष्ठिका (alveoli) कहा जाता है, में होती है। संक्षेप में, बाह्य श्वसन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा रक्त फेफड़ों से ऑक्सीजन (O2 ) ग्रहण करता है और अपने साथ लाई हुई कार्बन डाइऑक्साइड (CO2 ) को फेफड़ों में छोड़ देता है।
32. प्रकाश संश्लेषण क्या है ? इसकी रासायनिक अभिक्रिया के समीकरण लिखें। (2 अंक)
प्रकाश संश्लेषण वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे और कुछ अन्य जीव सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन बनाते हैं। इस प्रक्रिया में, पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), जड़ों से जल (H₂O) लेते हैं और क्लोरोफिल (पत्तियों में मौजूद हरा वर्णक) तथा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में इन्हें रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज) में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रक्रिया के सह-उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन (O₂) गैस निकलती है।
33. रंध्र तथा वातरंध्र की श्वसन में क्या भूमिका है ? (2 अंक)
पौधों में श्वसन के लिए गैसों का आदान-प्रदान आवश्यक होता है, और इसमें रंध्र तथा वातरंध्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। **रंध्र (Stomata) की भूमिका:** स्थान: रंध्र मुख्य रूप से पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्र होते हैं। कार्य: इनका मुख्य कार्य गैसों का विनिमय करना है। श्वसन की प्रक्रिया में, पौधे इन्हीं रंध्रों के माध्यम से वायुमंडल से ऑक्सीजन (O2 ) ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2 ) को बाहर निकालते हैं। यह प्रक्रिया दिन और रात दोनों समय चलती रहती है। **वातरंध्र (Lenticels) की भूमिका:** स्थान: वातरंध्र पुराने, काष्ठीय (लकड़ी वाले) तनों और कुछ जड़ों की छाल पर पाए जाने वाले छिद्र होते हैं। कार्य: तने की मोटी छाल गैसों के लिए अपारगम्य होती है, इसलिए तने के भीतरी जीवित ऊतकों तक ऑक्सीजन का पहुँचना मुश्किल होता है। वातरंध्र इन आंतरिक कोशिकाओं और वायुमंडल के बीच सीधे गैसों के आदान-प्रदान के लिए एक मार्ग प्रदान करते हैं। वे तने के ऊतकों को श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन (O2 ) उपलब्ध कराते हैं और उत्पन्न हुई कार्बन डाइऑक्साइड (CO2 ) को बाहर निकालते हैं।
34. रसारोहण क्या है ? (2 अंक)
रसारोहण (Ascent of Sap) क्या है? रसारोहण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधों की जड़ों द्वारा अवशोषित जल और खनिज लवण, गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध, पौधे के विभिन्न ऊपरी भागों जैसे तना, शाखाओं और पत्तियों तक पहुँचते हैं। इस जल और खनिज के घोल को 'रस' (Sap) कहते हैं।
35. जिबेरेलिन है (1 अंक)

सही उत्तर: (A) पादप हॉर्मोन

  • (A) पादप हॉर्मोन
  • (B) एंजाइम
  • (C) कार्बोहाइड्रेट
  • (D) वसा
36. पत्तियों का मुरझाना किस पादप हॉर्मोन के कारण होता है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (B) एबसिसिक अम्ल

  • (A) इथिलीन
  • (B) एबसिसिक अम्ल
  • (C) साइटोकाइनिन
  • (D) ऑक्सिन
37. रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित करता है (1 अंक)

सही उत्तर: इंसुलीन

  • एस्ट्रोजन
  • प्रोजेस्टेरोन
  • इंसुलीन
  • रिलैक्सिन
38. मानव शरीर में सबसे लम्बी कोशिका कौन-सी है ? (1 अंक)

सही उत्तर: तंत्रिका कोशिका

  • मांसपेशियाँ
  • तंत्रिका कोशिका
  • रक्त कोशिका
  • हृदय कोशिका
39. अग्न्याशय में कौन-सा हॉर्मोन स्त्रावित होता है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (D) इन्सुलिन

  • (A) एपिनेफ्रीन
  • (B) टेस्टोस्टेरोन
  • (C) नॉरएपिनेफ्रीन
  • (D) इन्सुलिन
40. शरीर का संतुलन बनाए रखता है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) सेरिबेलम

  • (A) क्रेनियम
  • (B) सेरीब्रम
  • (C) सेरिबेलम
  • (D) मस्तिष्क स्टेम
41. सबसे छोटी अंतःस्रावी ग्रंथि है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) पीनियल

  • (A) एड्रिनल
  • (B) थाइरॉइड
  • (C) पीनियल
  • (D) इनमें से कोई नहीं
42. पादप हॉर्मोन का एक उदाहरण है (1 अंक)

सही उत्तर: (A) IAA

  • (A) IAA
  • (B) TSH
  • (C) ACH
  • (D) ACTH
43. ऑक्सैलिक अम्ल का प्राकृतिक स्त्रोत निम्नलिखित में कौन है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (A) टमाटर

  • (A) टमाटर
  • (B) इमली
  • (C) संतरा
  • (D) सिरका
44. हॉर्मोन क्या है ? (2 अंक)
हॉर्मोन हमारे शरीर में बनने वाले विशेष रासायनिक संदेशवाहक (chemical messengers) होते हैं। इन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) द्वारा बनाया जाता है। ये शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित और समन्वित करते हैं।
45. गर्मी में हमें पसीना क्यों आता है ? (2 अंक)
पसीना आना हमारे शरीर की एक प्राकृतिक और आवश्यक प्रक्रिया है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसे शरीर का प्राकृतिक शीतलन तंत्र (natural cooling system) भी कह सकते हैं।
46. परागण किसे कहते हैं ? परागण पर वर्षा का प्रभाव लिखें। (5 अंक)
परागण (Pollination)

परागण पौधों में लैंगिक जनन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
इस प्रक्रिया में, एक पुष्प के परागकोश (Anther) से परागकणों (Pollen grains) का उसी पुष्प या किसी अन्य पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) तक स्थानांतरण होता है।
यह प्रक्रिया निषेचन (Fertilization) के लिए आवश्यक है, जिससे आगे चलकर फल और बीज बनते हैं।

परागण के मुख्य प्रकार:

स्व-परागण (Self-Pollination):
जब एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर या उसी पौधे पर मौजूद किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित होते हैं, तो इस प्रक्रिया को स्व-परागण कहते हैं।

पर-परागण (Cross-Pollination):
जब एक पुष्प के परागकण उसी प्रजाति के किसी दूसरे पौधे पर स्थित पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे पर-परागण कहते हैं।
इस प्रक्रिया के लिए बाहरी कारकों या माध्यमों (Agents) जैसे हवा, पानी, कीट, पक्षी और अन्य जानवरों की आवश्यकता होती है।

परागण पर वर्षा का प्रभाव

वर्षा का परागण की प्रक्रिया पर सामान्यतः नकारात्मक और बाधाकारी प्रभाव पड़ता है। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

परागकणों का धुल जाना:
वर्षा की बूँदें जब फूलों पर गिरती हैं, तो वे परागकोश में मौजूद परिपक्व परागकणों को बहा ले जाती हैं।
साथ ही, वर्तिकाग्र पर गिरे हुए परागकण भी धुल जाते हैं, जिससे परागण की सफलता दर बहुत कम हो जाती है।

परागणकों की गतिविधि में बाधा:
अधिकांश पर-परागण कीटों (जैसे मधुमक्खी, तितली) और पक्षियों द्वारा होता है। वर्षा के समय ये जीव सक्रिय नहीं रहते और अपने छिपने के स्थानों पर चले जाते हैं।
उनकी अनुपस्थिति में परागण की प्रक्रिया रुक जाती है।

फूलों को भौतिक क्षति:
भारी वर्षा या ओलावृष्टि से फूलों की नाजुक पंखुड़ियाँ, वर्तिकाग्र और परागकोश क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
क्षतिग्रस्त फूल परागण करने या ग्रहण करने में असमर्थ हो जाते हैं।

मकरंद (Nectar) का पतला होना:
फूल कीटों को आकर्षित करने के लिए मकरंद नामक मीठा तरल पदार्थ उत्पन्न करते हैं।
वर्षा का पानी फूलों में जमा होकर मकरंद को पतला कर देता है, जिससे उसका आकर्षण कम हो जाता है और परागणक कीट उन फूलों की ओर नहीं आते।

वर्तिकाग्र की ग्रहणशीलता में कमी:
लगातार नमी और बारिश के कारण वर्तिकाग्र की सतह परागकणों को ग्रहण करने की क्षमता खो सकती है, जिससे परागकण उस पर अंकुरित नहीं हो पाते।

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, वर्षा परागण के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा है, विशेष रूप से उन पौधों के लिए जो हवा या कीटों पर निर्भर करते हैं।

यह पौधों के प्रजनन चक्र को बाधित करती है, जिससे फसलों की पैदावार और बीजों के उत्पादन में कमी आ सकती है।

हालांकि कुछ जलीय पौधों में परागण के लिए जल आवश्यक होता है, किन्तु अधिकांश स्थलीय पौधों के लिए वर्षा हानिकारक ही सिद्ध होती है।
47. मनुष्य के प्रमुख पाँच लैंगिक जनन, संचारित रोग, उनके कारक रोगाणु एवं लक्षणों को लिखें। (5 अंक)
मनुष्य के प्रमुख पाँच लैंगिक जनन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases - STDs), उनके कारक रोगाणु और लक्षण निम्नलिखित हैं:

1. सुजाक (Gonorrhoea)

कारक रोगाणु: यह रोग 'नाइस्सीरिया गोनोरियाई' (Neisseria gonorrhoeae) नामक जीवाणु (Bacteria) के कारण होता है।
लक्षण:
पुरुषों में: मूत्रमार्ग में सूजन, पेशाब करते समय तीव्र जलन और दर्द होता है, तथा शिश्न से पीला-हरा मवाद जैसा स्राव होता है।
स्त्रियों में: यह रोग अक्सर लक्षणहीन होता है, लेकिन कुछ मामलों में योनि से असामान्य स्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द और पेशाब में जलन हो सकती है।
समय पर इलाज न होने पर यह श्रोणि सूजन की बीमारी (Pelvic Inflammatory Disease - PID) और बांझपन का कारण बन सकता है।

2. सिफलिस (Syphilis)

कारक रोगाणु: यह रोग 'ट्रिपोनिमा पैलिडम' (Treponema pallidum) नामक जीवाणु (Bacteria) द्वारा होता है। लक्षण: इसके लक्षण कई चरणों में प्रकट होते हैं:

प्राथमिक चरण: संक्रमण के कुछ हफ्तों बाद जननांगों, मलाशय या मुंह में दर्द रहित घाव (जिसे 'चैंकर' कहते हैं) का बनना।

द्वितीयक चरण: त्वचा पर चकत्ते, बुखार, गले में खराश, बालों का झड़ना और जोड़ों में दर्द।

तृतीयक चरण: यदि इलाज न किया जाए, तो यह हृदय, मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

3. जननांग हर्पीज (Genital Herpes)

कारक रोगाणु: यह 'हर्पीज सिम्प्लेक्स विषाणु' (Herpes Simplex Virus - HSV) के कारण होता है, आमतौर पर HSV-2 प्रकार से।
लक्षण:
जननांगों या मलाशय के आसपास छोटे, दर्दनाक फफोले या छाले हो जाते हैं।
ये छाले फूटकर घाव बन जाते हैं जिनमें कई दिनों तक दर्द रहता है।
इसके साथ बुखार, शरीर में दर्द और लसीका ग्रंथियों में सूजन भी हो सकती है।
यह एक आजीवन संक्रमण है, जिसके लक्षण बार-बार प्रकट हो सकते हैं।

4. एड्स (AIDS - Acquired Immuno Deficiency Syndrome)

कारक रोगाणु: यह 'ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी विषाणु' (Human Immunodeficiency Virus - HIV) के संक्रमण से होता है।
लक्षण:
एच.आई.वी. (HIV) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-हेल्पर कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।
प्रारंभिक संक्रमण में फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं, जैसे बुखार, गले में खराश और थकान।
जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, व्यक्ति का वजन कम होने लगता है, लगातार दस्त, रात में पसीना आना और विभिन्न प्रकार के संक्रमण (जैसे निमोनिया, तपेदिक) होने का खतरा बढ़ जाता है।
एड्स, एच.आई.वी. संक्रमण की अंतिम अवस्था है।

5. यकृतशोथ-बी (Hepatitis-B) कारक रोगाणु: यह 'यकृतशोथ-बी विषाणु' (Hepatitis B Virus - HBV) के कारण होता है।
लक्षण:
यह विषाणु यकृत (liver) को संक्रमित करता है, जिससे उसमें सूजन आ जाती है।
इसके लक्षणों में थकान, जी मिचलाना, उल्टी, पेट दर्द, गहरे रंग का मूत्र और पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला होना) शामिल हैं।
यह एक गंभीर रोग है जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) और यकृत कैंसर (Liver Cancer) का कारण बन सकता है।
48. एंड्रोजेन्स स्रावित होता है (1 अंक)

सही उत्तर: (B) वृषण द्वारा

  • (A) अंडाशय द्वारा
  • (B) वृषण द्वारा
  • (C) ग्रहणी द्वारा
  • (D) आमाशय द्वारा
49. वर्तिका भाग है (1 अंक)

सही उत्तर: (B) जायांग का

  • (A) तंतु का
  • (B) जायांग का
  • (C) अंडाशय का
  • (D) पुंकेसर का
50. निम्नलिखित में किसमें द्विखंडन नहीं होता है ? (1 अंक)

सही उत्तर: यीस्ट में

  • यीस्ट में
  • पैरामीशियम में
  • युग्लीना में
  • अमीबा में
51. परागकण निम्न में से किसके अंदर बनते हैं ? (1 अंक)

सही उत्तर: परागकोष

  • अंडाशय
  • वर्तिका
  • पत्तियाँ
  • परागकोष
52. निम्नलिखित में नर युग्मक कौन है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (B) शुक्राणु

  • (A) अंडाणु
  • (B) शुक्राणु
  • (C) गर्भाशय
  • (D) फैलोपियन नलिका
53. द्विखंडन पाया जाता है (1 अंक)

सही उत्तर: (C) जीवाणु में

  • (A) स्पंज में
  • (B) हाइड्रा में
  • (C) जीवाणु में
  • (D) इनमें से कोई नहीं
54. किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन का कारण है (1 अंक)

सही उत्तर: (D) (A) और (C) दोनों

  • (A) टेस्टोस्टेरॉन
  • (B) थायरॉक्सिन
  • (C) एस्ट्रोजेन
  • (D) (A) और (C) दोनों
55. निम्नलिखित जीवों में किसमें अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (D) यीस्ट

  • (A) प्लाज्मोडियम
  • (B) लेस्मानिया
  • (C) अमीबा
  • (D) यीस्ट
56. आलू में कायिक प्रवर्धन होता है (1 अंक)

सही उत्तर: (D) तना द्वारा

  • (A) जड़ द्वारा
  • (B) बीज द्वारा
  • (C) फल द्वारा
  • (D) तना द्वारा
57. उभयलिंगी जीव का उदाहरण है (1 अंक)

सही उत्तर: (A) हाइड्रा

  • (A) हाइड्रा
  • (B) मनुष्य
  • (C) मछली
  • (D) बकरी
58. पुष्पों में दलपत्रों का क्या कार्य है ? (2 अंक)
दलपत्र पुष्प का रंगीन और आकर्षक भाग होते हैं।

इनके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
परागणकों को आकर्षित करना
परागण में सहायता करना
आंतरिक भागों की सुरक्षा
59. सजीवों के जनन के महत्त्व लिखें। (2 अंक)
जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सजीव अपने समान नए जीव या संतान को जन्म देते हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसके मुख्य महत्त्व निम्नलिखित हैं -
जाति की निरंतरता (Continuity of Species
समष्टि में स्थिरता (Population Stability)
विभिन्नताएँ उत्पन्न करना (Creation of Variations)
पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व (Existence of Life on Earth)
60. 'जीन' शब्द किसने प्रस्तुत किया ? (1 अंक)

सही उत्तर: जोहैन्सन

  • मेंडल
  • जोहैन्सन
  • लामार्क
  • डार्विन
61. मानव का उद्भव स्थान है (1 अंक)

सही उत्तर: अफ्रीका

  • भारत
  • चीन
  • अफ्रीका
  • अमेरिका
62. मानव में ऑटोसोम की जोड़ियों की संख्या होती है (1 अंक)

सही उत्तर: 22

  • 24
  • 23
  • 11
  • 22
63. DNA आनुवंशिकता का आधार है। कैसे ? (2 अंक)
DNA आनुवंशिकता का आधार है क्योंकि यह अनुवांशिक जानकारी को संग्रहीत और प्रसारित करता है। DNA में जीन होते हैं, जो प्रोटीन के निर्माण के लिए निर्देश प्रदान करते हैं। ये प्रोटीन जीव के विकास, वृद्धि और कार्यों को नियंत्रित करते हैं। जब जीव जनन करते हैं, तो वे अपने DNA को अगली पीढ़ी में स्थानांतरित करते हैं, जिससे आनुवंशिक लक्षणों का संचरण होता है।
64. आहार श्रृंखला क्या है ? इसे एक उदाहरण द्वारा समझायें। (5 अंक)
आहार श्रृंखला (Food Chain) परिभाषा: किसी भी पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) में, ऊर्जा का प्रवाह एक जीव से दूसरे जीव में एक श्रृंखला के रूप में होता है। जीवों की इस श्रृंखला को जिसमें खाने और खाए जाने की प्रक्रिया द्वारा ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, आहार श्रृंखला कहते हैं। सरल शब्दों में, यह हमें बताता है कि 'कौन किसको खाता है'। आहार श्रृंखला के चरण (पोषी स्तर - Trophic Levels): आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण या कड़ी एक पोषी स्तर बनाता है। उत्पादक (Producers): ये वे जीव होते हैं जो सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। सभी हरे पौधे और शैवाल (algae) उत्पादक हैं। ये आहार श्रृंखला का पहला पोषी स्तर बनाते हैं। उपभोक्ता (Consumers): ये जीव अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। प्राथमिक उपभोक्ता (Primary Consumers): ये शाकाहारी (herbivores) होते हैं और सीधे उत्पादकों (पौधों) को खाते हैं। ये दूसरा पोषी स्तर बनाते हैं। द्वितीयक उपभोक्ता (Secondary Consumers): ये मांसाहारी (carnivores) होते हैं और प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाते हैं। ये तीसरा पोषी स्तर बनाते हैं। तृतीयक उपभोक्ता (Tertiary Consumers): ये वे मांसाहारी होते हैं जो द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं। ये चौथा पोषी स्तर बनाते हैं। अपघटक (Decomposers): ये वे सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया और कवक) होते हैं जो मृत पौधों और जानवरों को विघटित करके पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में मिला देते हैं। उदाहरण: घास के मैदान की आहार श्रृंखला आइए एक सरल आहार श्रृंखला का उदाहरण देखें: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज इस उदाहरण को चरण-दर-चरण समझते हैं: चरण 1: घास (उत्पादक) घास एक उत्पादक है। यह सूर्य की ऊर्जा से अपना भोजन बनाती है। यह आहार श्रृंखला का आधार है। चरण 2: टिड्डा (प्राथमिक उपभोक्ता) टिड्डा एक शाकाहारी जीव है जो घास को खाता है। ऊर्जा घास से टिड्डे में स्थानांतरित होती है। चरण 3: मेंढक (द्वितीयक उपभोक्ता) मेंढक एक मांसाहारी जीव है जो टिड्डे को खाता है। इस प्रकार, ऊर्जा टिड्डे से मेंढक में जाती है। चरण 4: साँप (तृतीयक उपभोक्ता) साँप, मेंढक को खा जाता है। यहाँ ऊर्जा मेंढक से साँप में स्थानांतरित होती है। चरण 5: बाज (उच्च स्तरीय उपभोक्ता) बाज इस श्रृंखला का शीर्ष शिकारी है जो साँप को खाता है। ऊर्जा साँप से बाज में स्थानांतरित होती है। निष्कर्ष: इस उदाहरण से स्पष्ट है कि आहार श्रृंखला ऊर्जा के एकदिशीय प्रवाह (unidirectional flow) को दर्शाती है, जो उत्पादकों से शुरू होकर विभिन्न स्तर के उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 90%) जीव की जैविक क्रियाओं और ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है, और केवल लगभग 10% ऊर्जा ही अगले स्तर पर स्थानांतरित होती है। इसी कारण आहार श्रृंखलाएं प्रायः 4 या 5 पोषी स्तरों से अधिक लंबी नहीं होती हैं।
65. ओजोन परत का अवक्षय करता है (1 अंक)

सही उत्तर: (B) CFC

  • (A) ATP
  • (B) CFC
  • (C) NADP
  • (D) DDT
66. ओजोन परत किस हानिकारक विकिरण से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (C) पराबैंगनी विकिरण

  • (A) अवरक्त विकिरण
  • (B) तापीय विकिरण
  • (C) पराबैंगनी विकिरण
  • (D) इनमें से सभी
67. बाघ उपभोक्ता है (1 अंक)

सही उत्तर: तृतीय पोषी स्तर का

  • प्रथम पोषी स्तर का
  • द्वितीय पोषी स्तर का
  • तृतीय पोषी स्तर का
  • इनमें से कोई नहीं
68. ओजोन क्या है ? इसके महत्व को बताएँ। (2 अंक)
ओजोन (O3 ) - ओजोन ऑक्सीजन का एक अपरूप (allotrope) है। जहाँ सामान्य ऑक्सीजन अणु में दो परमाणु (O2 ) होते हैं, वहीं ओजोन में ऑक्सीजन के तीन परमाणु (O3) होते हैं। यह एक हल्के नीले रंग की गैस है जिसमें एक विशेष तीखी गंध होती है। **ओजोन का महत्व** 1. सुरक्षा कवच के रूप में 2. हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाव 3. जीवों की रक्षा 4. पृथ्वी के तापमान का संतुलन
69. पर्यावरण क्या है ? (2 अंक)
पर्यावरण शब्द दो शब्दों 'परि' और 'आवरण' के मेल से बना है। 'परि' का अर्थ है 'हमारे चारों ओर' और 'आवरण' का अर्थ है 'जो हमें घेरे हुए है'। इसलिए, हमारे चारों ओर जो कुछ भी है, वह पर्यावरण कहलाता है। इसमें सभी सजीव (जैविक) वस्तुएँ जैसे कि पेड़-पौधे, जीव-जंतु, मनुष्य और निर्जीव (अजैविक) वस्तुएँ जैसे कि हवा, पानी, मिट्टी, प्रकाश और तापमान शामिल हैं। ये सभी सजीव और निर्जीव घटक मिलकर हमारे पर्यावरण का निर्माण करते हैं और एक-दूसरे पर प्रभाव डालते हैं।
70. जैव-आवर्धन क्या है ? (2 अंक)
जैव-आवर्धन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कुछ हानिकारक और विषैले पदार्थ, जैसे कीटनाशक (DDT) या भारी धातुएँ (पारा), खाद्य श्रृंखला (food chain) में प्रवेश करते हैं और प्रत्येक अगले पोषी स्तर (trophic level) पर उनकी सांद्रता (concentration) बढ़ती जाती है।
71. वर्षा-जल के संचयन के लाभ का संक्षिप्त विवरण दें। (5 अंक)
वर्षा-जल संचयन का अर्थ है वर्षा के पानी को एकत्रित करके भविष्य के उपयोग के लिए संग्रहीत करना। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसके कई लाभ हैं। इसका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है: 1. जल की उपलब्धता में वृद्धि: वर्षा-जल संचयन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पानी की उपलब्धता को बढ़ाता है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है या जहाँ केवल मानसून के दौरान ही वर्षा होती है, वहाँ संग्रहीत जल का उपयोग साल भर विभिन्न कार्यों जैसे पीने, सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए किया जा सकता है। 2. भूजल स्तर में सुधार: शहरीकरण के कारण, अधिकांश जमीन कंक्रीट से ढक गई है, जिससे वर्षा का पानी जमीन में रिस नहीं पाता और बहकर नालियों में चला जाता है। वर्षा-जल संचयन प्रणाली, जैसे कि सोख्ता गड्ढों (recharge pits) के माध्यम से, पानी को सीधे भूजल तक पहुँचाया जाता है। इससे भूजल का स्तर बढ़ता है, जो कुओं और बोरवेल को रिचार्ज करने में मदद करता है। 3. बाढ़ के खतरे को कम करना: जब भारी वर्षा होती है, तो पानी तेजी से बहता है और निचले इलाकों में जल-जमाव और बाढ़ का कारण बनता है। वर्षा-जल संचयन इस अतिरिक्त पानी को संग्रहीत कर लेता है, जिससे सड़कों और रिहायशी इलाकों में पानी भरने का खतरा कम हो जाता है। 4. मिट्टी के कटाव को रोकना: तेजी से बहता हुआ वर्षा का पानी अपने साथ मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत को भी बहा ले जाता है, जिसे मिट्टी का कटाव कहते हैं। जब वर्षा के पानी को संग्रहीत किया जाता है, तो पानी का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद मिलती है। 5. पानी के बिल में कमी: जब आप वर्षा के संग्रहीत जल का उपयोग बगीचों, शौचालय फ्लश करने, या गाड़ी धोने जैसे कामों के लिए करते हैं, तो आपकी नगर निगम की जल आपूर्ति पर निर्भरता कम हो जाती है। इससे आपके पानी के बिल में काफी कमी आ सकती है। 6. जल की गुणवत्ता: वर्षा का जल प्राकृतिक रूप से शुद्ध और मृदु (soft) होता है। इसमें लवण और खनिज की मात्रा कम होती है, जो इसे पौधों और कुछ घरेलू उपकरणों के लिए बेहतर बनाता है। संक्षेप में, वर्षा-जल संचयन एक पर्यावरण-अनुकूल, आर्थिक रूप से लाभकारी और टिकाऊ विधि है जो जल संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
72. वनों की कटाई का वन्य जीवों पर क्या प्रभाव पड़ता है ? (5 अंक)
वनों की कटाई, जिसे वनोन्मूलन भी कहा जाता है, का वन्यजीवों पर बहुत गहरा और विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव बहुआयामी होता है, जिसे हम चरण-दर-चरण समझ सकते हैं: **चरण 1: प्राकृतिक आवास का विनाश** वन्यजीवों के लिए वन उनके घर (प्राकृतिक आवास) होते हैं। यहीं वे रहते हैं, प्रजनन करते हैं और अपने बच्चों को पालते हैं। जब पेड़ों को काटा जाता है, तो इन जीवों का आश्रय छिन जाता है। उन्हें अपना घर छोड़ने और नए सुरक्षित स्थान की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो अक्सर मुश्किल और खतरनाक होता है। **चरण 2: भोजन की कमी** वन वन्यजीवों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं। शाकाहारी जानवर पेड़ों की पत्तियाँ, फल, और छाल खाकर जीवित रहते हैं। मांसाहारी जानवर इन शाकाहारी जानवरों का शिकार करते हैं। वनों की कटाई से यह पूरी भोजन श्रृंखला (food chain) बाधित हो जाती है। भोजन के स्रोत नष्ट हो जाने के कारण जानवरों को भुखमरी का सामना करना पड़ता है। **चरण 3: मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि** जब वन्यजीव अपना आवास और भोजन खो देते हैं, तो वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों, जैसे गाँवों और खेतों की ओर पलायन करते हैं। इसके कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा होती है। जानवर फसलों को बर्बाद कर देते हैं या पालतू पशुओं पर हमला कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मनुष्य अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें मार देते हैं। **चरण 4: जैव विविधता की हानि** वन लाखों प्रजातियों के पौधों और जानवरों का घर हैं। वनों की कटाई के कारण कई दुर्लभ प्रजातियाँ अपना अस्तित्व खो देती हैं और विलुप्त हो जाती हैं या विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जाती हैं। इससे पृथ्वी की जैव विविधता (biodiversity) को भारी नुकसान होता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाता है। **चरण 5: जल स्रोतों का सूखना और जलवायु पर प्रभाव** वन जल चक्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे वर्षा को आकर्षित करते हैं और भूजल को रिचार्ज करते हैं। वनों के कटने से वर्षा कम हो जाती है और नदियाँ व तालाब सूखने लगते हैं, जिससे वन्यजीवों के लिए पीने के पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा, वन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को सोखकर जलवायु को नियंत्रित करते हैं। उनकी कटाई से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है, जो वन्यजीवों के जीवन के लिए और भी कठिन परिस्थितियाँ पैदा करती है।
73. हाइड्रिला पाया जाता है (1 अंक)

सही उत्तर: (A) जल में

  • (A) जल में
  • (B) मृदा में
  • (C) वृक्ष पर
  • (D) इनमें से सभी
74. निम्नलिखित में से किसके द्वारा औद्योगिक क्षेत्र में अम्ल वर्षा होती है ? (1 अंक)

सही उत्तर: (B) सल्फर डाईऑक्साइड

  • (A) क्लोरोफ्लोरोकार्बन
  • (B) सल्फर डाईऑक्साइड
  • (C) ओजोन
  • (D) कार्बन डाईऑक्साइड
75. वन संपदाओं पर निर्भर किन्हीं दो उद्योगों के नाम बताएँ। (2 अंक)
वन संपदा, यानी वनों से प्राप्त होने वाले संसाधन, कई उद्योगों के लिए कच्चे माल का आधार हैं। प्रश्न में ऐसे ही किन्हीं दो उद्योगों के नाम पूछे गए हैं। **वन संपदाओं पर निर्भर दो प्रमुख उद्योग निम्नलिखित हैं:** कागज़ उद्योग (Paper Industry) फर्नीचर उद्योग (Furniture Industry) इनके अतिरिक्त, माचिस उद्योग, औषधि निर्माण उद्योग (जड़ी-बूटियों के लिए) और खेल का सामान बनाने वाले उद्योग भी वन संपदा पर निर्भर हैं।
76. वन संरक्षण हेतु क्या कदम आवश्यक हैं ? (2 अंक)
**वन संरक्षण के लिए आवश्यक कदम निम्नलिखित हैं:** वनीकरण और पुनर्वनीकरण (Afforestation and Reforestation) अवैध कटाई पर रोक वनों को आग से बचाना झूम खेती (Slash-and-burn Cultivation) पर नियंत्रण जन-जागरूकता अभियान चलाना सामाजिक वानिकी (Social Forestry) को बढ़ावा संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना
और PYQ + solutions — App खोलें